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वेतन बढाने की मांग कर कार्य बहिष्कार पर गए दर्जनों कर्मियों को इंडिगो ने निकाला

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कार्य बहिष्कार पर गए कर्मियों को इंडिगो ने सस्पेंड किया

Dehradun. देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर वेतन बढाने की मांग कर कार्य बहिष्कार पर गए दर्जनों कर्मियों को इंडिगो की एजाइल कंपनी ने सस्पेंशन लेटर थमा दिया है।

जिससे दर्जनों युवाओं के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कार्य बहिष्कार कर रहे इंडिगो कर्मियों का कहना है कि उन्हे नियमानुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है। जिस कारण उन्होंने पिछले तीन-चार दिनों से कार्य बहिष्कार किया है। कुछ दिनों पहले तक एयरपोर्ट पर इंडिगो की आधा दर्जन के लगभग फ्लाइटें आती थी। लेकिन अब एक दर्जन से अधिक फ्लाइटें आ रही हैं।

इसके बावजूद कंपनी कह रही है कि वो घाटे में चल रही है। मंगलवार के दिन क्षेत्रीय सभासद राजेश भट्ट, संदीप नेगी, प्रदीप नेगी, विनय कंडवाल, राजवीर खत्री, मोहित उनियाल आदि एयरपोर्ट पहुंचे और कार्य बहिष्कार कर रहे कर्मियों की समस्या सुनते हुए फोन पर कंपनी के अधिकारियों से बात की।

लेकिन कंपनी के अधिकारी एयरपोर्ट से बाहर नहीं आए। इंडिगो के अधिकारी ने फोन पर सभासदों से कहा कि यदि कार्य बहिष्कार पर गए कर्मी माफीनामा देते हैं तो उन्हे काम पर वापस रखा जा सकता है।

वेतन बढोत्तरी की बात को कंपनी के अधिकारी टाल गए। उधर यूकेडी ने इंडिगो कर्मियों की समस्या को लेकर श्रमायुक्त से मिलकर बातचीत की। यूकेडी नेता शिवप्रसाद सेमवाल ने उप मुख्य श्रम आयुक्त सुशील कुमार से कहा कि कर्मियों को 537 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान होना चाहिए। जिसका बोर्ड भी एयरपोर्ट पर लगा हुआ है।

ज्ञापन सौंपने वालों में यूकेडी की किरण रावत, राजेश्वरी रावत, अरविंद बिष्ट, अरविंद बिष्ट, किरण रावत, राजेश्वरी रावत, सीमा रावत, लक्ष्मी रावत आदि शामिल रहे। इंडिगो के मैनेजर विपिन शर्मा ने कहा कि कार्य बहिष्कार पर गए कर्मी माफीनामा के साथ काम पर वापस आ सकते हैं। वेतन वृद्धि के बारे में कहा कि इसके बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है।

मैनेजर द्वारा जिस कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन का नंबर दिया गया उस पर संपर्क करने पर जानकारी दी गई कि इंडिगो द्वारा अपने सभी कर्मियों को समय पर वेतन देकर उनके भले के लिए कार्य किया जा रहा है। और पिछले एक वर्ष में उन्होंने किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाया है।

 

पहले जंगल-जमीनें गई, रास्ते बंद हुए अब रोजगार भी छीना

Dehradun. ये बात सच है कि देहरादून एयरपोर्ट प्रदेश के पर्यटन और तीर्थाटन में मिल का पत्थर साबित हो रहा है। सामरिक दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन दूसरा सच ये भी है कि जिन लोगों ने एयरपोर्ट के लिए अपनी खेती की जमीनें दी। आज उनके रास्ते बंद कर दिए गए हैं।

कोठारी मोहल्ला, बागी, सैनिक मोहल्ला, बिचली जौली में जाने को कोई ऐसा सीधा रास्ता नहीं है। जहां से फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस जा सके। कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं को जरूर टैक्सी चलाने या श्रमिक का रोजगार एयरपोर्ट पर मिला है। जो अब उनसे छीना जा रहा है।

एयरपोर्ट के कारण आसपास के मोबाइल टावर हटा दिए गए हैं। या उनकी ऊंचाई कम कर दी गई है। जिससे हजारों की आबादी को नेटवर्क की समस्या पैदा हो गई है। कोरोनाकाल में बच्चे ऑन लाइन पढाई नहीं कर पा रहे हैं।

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