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गजब: मरीज अस्पताल के अंदर न आएं, इसलिए दरवाजे पर बांध रखी है रस्सी

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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय जौलीग्रांट में डॉक्टरों ने बनाई मरीजों से दूरी

Dehradun. कोरोना महामारी के समय में जब मरीजों को सबसे अधिक चिकित्सकों और अस्पतालों की जरूरत है। तब ऐसे समय में कुछ चिकित्सक और अस्पताल ऐसे भी हैं जिन्होंने मरीजों से दूरी बना रखी है।

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय जौलीग्रांट में मरीजों को अस्पताल के अंदर आने से रोकने के लिए अस्पताल के मुख्य दरवाजे पर एक रस्सी बांधी गई है। जिससे कोई भी मरीज अस्पताल के अंदर न आ सके। इस अस्पताल में कोरोना महामारी के समय यदि कोई भी मरीज डॉक्टर से परामर्श या चेकअप करवाने जा रहा है तो उसे बाहर से ही भगा दिया जा रहा है। यहां के डॉक्टरों और मेडिकल स्टॉफ ने मरीजों से दूरी बना रखी है।

शुक्रवार को जौलीग्रांट की एक महिला तबीयत बिगडने पर अपना ब्लड प्रेशर चेक करवाने गई तो उसे अंदर नहीं आने दिया गया। और अस्पताल के स्टॉफ ने कहा कि ब्लड प्रेशर चेक करने की मशीन खराब है। एक महीने पहले भी इस अस्पताल के स्टॉफ ने यही जवाब दिया था कि उनके अस्पताल की बीपी चेक करने की मशीन खराब है।

जबकि बीपी चेक करने की मशीन एक साधारण मशीन होती है। यदि ये मशीन खराब भी हुई हो तो कोरोना विस्फोट को देखते हुए इस मशीन को जल्द ठीक करना या बदलवाना चाहिए था। एक ओर सभी अस्पताल के मेडिकल स्टॉफ और डॉक्टरों ने इस समय कोरोना महामारी से निपटने को अपनी जान तक दाव पर लगा रखी है। वहीं ऐसे भी अस्पताल हैं।

जहां मरीजों को अस्पताल के अंदर आने से रोकने के लिए रस्सी बांधी गई है। और बाहर से ही मरीजों को कोई न कोई बहाना बनाकर चलता किया जा रहा है। उधर अस्पताल के फार्मेसिस्ट अमरेन्द्र मेहरा ने कहा कि अस्पताल में पिछले लगभग एक साल से डॉक्टर नहीं है। वो ही व्यवस्था देख रहे हैं। कहा कि अस्पताल के दरवाजे पर रस्सी बांधी गई है ताकि जांच के बाद ही मरीजों को अंदर आने दिया जाए। वहीं एसडीएम डोईवाला लक्ष्मीराज चौहान ने कहा कि वो इस मामले को देखेंगे।

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