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ब्याजमुक्त किसान ऋण पर वसूला जा रहा सात प्रतिशत ब्याज: कांग्रेस

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किसानों को नहीं मिल रहा ब्याजमुक्त किसान ऋण

Dehradun. किसान कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के ब्याजमुक्त किसान ऋण के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

ब्याजमुक्त किसान ऋण के नाम पर किसानों से एक लाख और तीन लाख के किसान ऋण पर सात प्रतिशत ब्याज किसानों से वसूला जा रहा है। जबकि सात प्रतिशत ब्याज को राज्य सरकार व नाबार्ड को मिलकर चुकाना था। लेकिन इस ब्याज को किसानों पर थोप दिया गया है।

किसान कांग्रेस के विस अध्यक्ष उमेद बोरा ने कहा कि किसान ऋण का नाबार्ड ने अब तक 2017, 18 तक व राज्य सरकार ने सितम्बर 2020 तक का ही ब्याज दिया है। 2018, 19, 20 व 21 तक का ब्याज सरकार व नाबार्ड ने नहीं चुकाया है। इसलिए यह ब्याज अब किसानों पर थोप दिया गया है। बहुउददेशीय किसान सेवा सहकारी समितियां किसानों से ब्याज वसूल रही हैं।

जिस कारण 1 लाख का अल्प कालीन व 3 लाख का मध्य कालीन ऋण मात्र कोरी घोषणा बनकर रहा गया है। 3 लाख का लोन समितियां नहीं दे पा रही हैं। साथ ही मशीनरी में कृषि विभाग में सभी किसानों को भी लाभ नही मिल पा रहा है। यह लाभ कुछ लोगों तक ही सीमित है। कहा कि इस संबध में मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा गया।

जिसमें गन्ने का सर्मथन मूल्य 450 रुपये प्रति कुंतल करने के साथ 15 दिनों के भीतर गन्ना का भुगतान करने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने वालों में मोहित उनियाल, मौ0 अकरम, महेश लोधी, मनोहर सैनी, मौ0 इकराम, उमेद बोरा आदि शामिल रहे।

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