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भारतीय संस्कृति की विश्व में अलग पहचान, भारतीय परंपराओं और सामाजिक सहष्णुता पर एसडीएम कॉलेज में गोष्ठी

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भारतीय परंपराओं, सामाजिक सहष्णुता पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

Dehradun. शहीद दुर्गामल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला में आयोजित भारतीय साहित्य और परंपराओं में सामाजिक सहष्णुता पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

एमबी कॉलेज हल्द्वानी से आए डॉ सिराज मोहम्मद ने अकबर के सुलह ए कुल की नीति पर प्रकाश डालते हुए शांति, सद्भावना और सहिष्णुता के बारे में बताते हुए कहा कि अकबर का मानना था कि हर धर्म में सच्चाई है। इसलिए उन्होंने अपनी रानियों को धर्म परिवर्तन के लिए कभी बाध्य नहीं किया। हिंदू धर्म ने अनेक संस्कृतियों, धर्मों को स्वीकार किया।

मोहम्मद तुगलक के समय रोहिलखंड से भाग कर लोग कुमाऊं में आ बसे थे। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय डॉ देवेंद्र गुप्ता ने भारतीय कला में शिव पर  बोलते हुए भारतीय शास्त्रों की विशेषताओं के बारे में बताया। कहा कि चित्रकला, वास्तुकला जो मंदिरों के प्रांगण और दीवारों पर उकेरी और गढ़ी हैं उनका सूक्ष्म अध्ययन करना जरूरी है। डा० स्मृति कुकशाल ने अपना शोधपत्र पढ़ा।

विशिष्ट अतिथि डा० प्रमोद भारतीय भारतीय ने समाज की सहिष्णुता को बताते हुए कहा कि सीता की छवि को दूषित करने के अनेकों प्रयास किए गए लेकिन जन मानस शांत वसहज बना रहा। युधिष्ठर , कर्ण, बुद्ध से लेकर गांधी में सहष्णुता परिलक्षित होती है। इस अवसर पर प्राचार्य डीसी नैनवाल, डा० डीएन तिवारी, डा० डीपी सिंह,

डा० संतोष वर्मा, डा० आरएस रावत, डा० कंचन सिंह, डा०राखी पंचोला, डा० पूनम पाण्डे, डा० पल्लवी मिश्रा, डा० अफरोज इकवाल, डा० एनडी शुक्ला, डा० दीपा शर्मा, डा० नीलू कुमारी ,डा० बल्लरी कुकरेती, डा०नूर हसन, डा० स्मृति कुकशाल, डा० रेखा नौटियाल,

डा० प्रतिभा बलूनी, डा० ममता ध्यानी , डा० प्रदीप, डा० प्रमोद कुमार, डा० कुसुम डोबरियाल, डा० अरविन्द सिंह रावत, डा० इमरान खान ,डा० शटीश उनियाल, डा० राजेस्वरी, डा० अनिल, डा० रूचि कुलश्रेष्ठ, डा० ऊषारानी नेगी उपस्थित रहे।

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