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कैकयी ने की श्रीराम को वनवास और भरत को राजगद्दी देने की मांग

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देहरादून। नवयुवक रामलीला समिति जौलीग्रांट के तत्वाधान में आयोजित रामलीला में तीसरे दिन कैकयी-दशरथ संवाद और राम बनवास का बहुत ही सुंदर मंचन किया गया।

रामलीला मंचन में दशरथ-कैकेयी संवाद के साथ श्रीराम का वन जाना और राजा दशरथ का सुमंत को जंगल में भेजने के साथ श्रीराम-केवट का संवाद दिखाया गया। मंथरा रानी कैकेयी को राजा दशरथ द्वारा दिए गए दो वर मांगने की बात याद दिलाती है। मंथरा की बातों में आकर कैकेयी राम को राजगद्दी देने के प्रस्ताव से नाराज होकर कोप भवन में जाती है। राजा के पूछने पर वह श्रीराम को वनवास और भरत को राजगद्दी देने की मांग करती है।

श्रीराम के साथ वन जाने के लिए माता सीता व लक्ष्मण भी तैयार हो जाते हैं। श्रीराम वनवास जाते है। राम के वियोग में तड़प रहे राजा दशरथ सुमंत को श्रीराम को वापस लाने के लिए जंगल भेजते हैं। लेकिन श्रीराम नहीं आते हैं। लोग राजा को धीरज धराते हैं। इस पर राजा दशरथ कहते हैं कैसे अब धीर धरूं, किस बात पर आए सबर, राम वन को चल दिए, हमको बिलखता छोड़कर..। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विनोद पवार, सुभाष पाल, समिति के अध्यक्ष जोगिंदर पाल, संरक्षक मनोज नौटियाल, संदीप कुमार, हरिश्चंद्र कोहली, संजय वर्मा, केसर सिंह, मंच निर्देशक सुरेश कुमार, पंकज रावत, मयूर गैरोला, वेद प्रकाश आदि उपस्थित रहे।

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