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मन को सुकून से भर देती है कालूसिद्ध की प्राकृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा

साल जंगल और सौंग नदी के बीच में स्थित है सिद्ध पीठ कालू सिद्ध का मंदिर

देहरादून। देहरादून के चार पत्रित सिद्ध पीठों में एक कालू सिद्ध बाबा का मंदिर भी है। जो कालूवाला में साल के घने जंगल और सौंग नदी के बीच में स्थित है। इस मंदिर में आकर मन शांति और सुकून से भर जाता है।
जिस कारण श्रद्धालु घंटों तक मंदिर और परिसर में बैठना पंसद करते हैं। देहरादून में चार पवित्र सिद्ध पीठ कालू सिद्ध, लक्ष्मण सिद्ध, माणक सिद्ध और मांडू सिद्ध हैं। जिनसे हजारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।
सभी चारों सिद्ध पीठ घने जंगलों में स्थित हैं। कालू सिद्ध में क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था है। शादी-ब्याह, मकान बनाने, नया वाहन खरीदने या कोई भी शुभ कार्य किए जाने पर सबसे पहले क्षेत्रवासी और दूर-दूर के श्रद्धालु कालू सिद्ध मंदिर में गुड का प्रसाद चढाकर मत्था टेकते हैं।
वहीं बच्चों के पास होने और नई फसल घर आने पर भी मंदिर में प्रसाद चढाकर पूजा-अर्चना की जाती है। ये परंपरा कई पीढियों से चली आ रही है।

खास बात यह है कि मंदिर आज भी प्राकृतिक रूप में मौजूद है। मंदिर के चारों तरफ दीवारें और गर्भगृह के ऊपर कंक्रीट की छत नहीं है। जिस कारण मंदिर के अंदर से ही चारों तरफ के खूबसूरत प्राकृतिक नजारे साफ दिखाई देते हैं।
स्वच्छ हवा के साथ साल के बड़े-बड़े दरख्तों और उनके फूलों की खुसबू मन को ताजगी से भर देती है। खासकर सुबह के वक्त शांत वातावरण में कल-कल बहने वाली सौंग नदी, वन्य जीवों और पक्षियों की आवाजें श्रद्धलुओं को एहसास कराती हैं कि वो प्रकृति की गोद में बैठे हुए हैं।
मंदिर में प्रत्येक रविवार को दूर-दूर से सैकड़ों श्रद्धालु गुड का प्रसाद चढाकर दूध से जलाभिषेक करते हैं।
कौन हैं कालू सिद्ध बाबा
देहरादून। कालू सिद्ध बाबा को महान संत और भगवान दत्तात्रेय के चौरासी सिद्ध शिष्यों में से एक माना जाता है। जिन्होंने त्रेता युग में कालूवाला में भगवान शिव की तपस्या का सिद्धियां प्राप्त की थीं। महंत अंकुश शर्मा ने कहा कि कालू सिद्ध बाबा का समाधि स्थल मोतीचूर हरिद्वार में है।
कालू सिद्ध में वार्षिक भंडारा आज
देहरादून। कालू सिद्ध मंदिर में आज वार्षिक भंडारे का आयोजन किया जाएगा। जिसमें करीब बीस हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावनाएं जताई गई हैं।
शनिवार शाम सात बजे से अखंड पाठ की शुरूआत होगी। जबकि आज हवन, पूर्ण आहूति, भोग और प्रसाद वितरण के बाद भंडारे की शुरूआत की जाएगी। जिसकी सभी तैयारियां मंदिर समिति द्वारा पूरी कर ली गई हैं।

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