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एयरपोर्ट का जंगल बचाने को विभिन्न संगठनों ने फिर भरी हुंकार

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जलवायु परिवर्तन काल्पनिक नहीं वैश्विक आपातकाल है

Dehradun. एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए प्रस्तावित थानों वन रेंज के काटे जाने वाले जंगल को बचाने के लिए विभिन्न संगठनों ने फिर एयरपोर्ट के पास प्रदर्शन किया।

इन संगठनों की मांग है कि विकास के नाम पर प्रकृति से छेड़छाड़ करने से पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा। वहीं मानव व वन्य जीवों में संघर्ष भी बढेगा। और जंगल कटने से जंगल से सटी हुई जाखन नदी के अस्तित्व पर भी असर पड़ेगा।

प्रदर्शन करने वाले संगठनों का कहना है कि 2006 में पहले ही थानों वन रेंज का एक बड़ा भूभाग एयरपोर्ट विस्तरीकरण के लिए काटा जा चुका है। जिससे अब हाथी लोगों के खेतों और कई बार सड़कों पर घूमने लगे हैं। एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए 100 हेक्टयर से अधिक की भूमि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिसमें अधिकांश भूमि वन क्षेत्र है।

कार्यकर्ताओं ने हाथों में नारे लिखे हुए बैनर और पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। जिसमें थानों बचाओ, जलवायु परवर्तन काल्पनिक नहीं वैश्विक आपातकाल आदि लिखा हुआ था।  पर्यावरण संगठन से जुड़े प्रतीक बहुगुणा ने कहा कि बार-बार वन क्षेत्र और वन्य जीवों की अनदेखी से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा। जिसका खामियाजा सबको भुगतना पड़ेगा। एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए वनों व प्रकृति से छेड़छाड़ ठीक नहीं है।

विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यकर्तओं ने पेड़ों को रक्षासुत्र बांधकर प्रकृति का बचाने का संकल्प लिया। मैड संगठन, फ्लोरा सेविरस, दृष्टिकोण समिति, तारा फाउंडेशन आदि संगठनों ने कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। मौके पर सावन डोभाल, डीएस लिडिंग टिबिटन, जेपी मैठाणी आदि उपस्थित रहे।

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