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लौट आया पुराने दौर का मौसम, बारिश-ओलावृष्टि से नहीं बढ रहा तापमान

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देहरादून। देहरादून और पूरे उत्तराखंड को पुराने दौर में जिस मौसम के कारण जाना जाता था। लगता है मौसम का वो दौर फिर लौट आया है।

इस वर्ष जनवरी के महीने से अब तक लगभग हर हफ्ते होने वाली बारिश व ओलावृष्टि के कारण इस वर्ष तापमान पिछले वर्षो की तुलना में काफी कम बना हुआ है। यदि देहरादून की ही बात करें तो पिछले वर्षो में मई माह में अधिकतम तापमान चालीस डिग्री के करीब पहुंच जाता था। और कुछ दिनों के लिए चालीस को पार भी कर जाता था।

लेकिन इस वर्ष मई का आधा महीना बीतने के बावजूद अधिकतम तापमान तीस-बत्तीस डिग्री के करीब ही रूका हुआ है। लॉक डाउन के कारण अब भी काफी लोग घरों में हैं। इसलिए जंगलों में मानव का हस्तक्षेप लगभग ना के बराबर है। जिस कारण जंगलों में अभी तक आग की एक भी घटना नहीं हुई है। क्योंकि जंगलों की आग तापमान बढने और दम घोटु धुंए का कारण बनती हैं।

दूसरे लगभग हर हफ्ते होने वाली बारिश, ओलावृष्टि आदि से तापमान पिछले वर्षो के मुकाबले काफी कम चल रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे पुराने दौर का मौसम लौट आया है। उत्तराखंड बनने के पहले तक देहरादून और आसपास का मौसम कुछ ऐसा था कि गर्मी तेज होने के दिन ही बादल उमड़-घुमड़कर बरसकर चले जाते थे। इसलिए पहले लोग कहा भी करते थे कि देहरादून का मौसम कब बदल जाए पता ही नहीं चलता है।

इसी मौसम के कारण पुराने जमाने से ही अंग्रेज और पर्यटक खासकर देहरादून और मसूरी को काफी पंसद करते थे। बॉलीवुड का वो मशहूर गीत हुस्न पहाड़ों का…. क्या कहने कि बारो महीने यहां मौसम जाड़ों का…. उस समय के मौसम को ध्यान में रखकर ही बनाया गया था।

लेकिन दशकों बाद अब देहरादून और आसपास के क्षेत्र में अब तक कुछ वैसा ही मौसम देखने को मिल रहा है। मई में भी लोग हल्की स्पीड़ से पंखों को चला रहे हैं। रात में तो तापमान काफी कम होने से पंखों की रफ्तार को कम करना पड़ता है। कारण जो भी हो लेकिन लोग इसे पुराने दौर का मौसम कह रहे हैं।

कल पांच जिलों में बारिश की संभावनाएं

देहरादून। मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश के उत्तरकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ जनपदों में गरज चमक के साथ हल्की बारिश की संभावनाएं जताई हैं। उसके बाद अगले तीन दिन प्रदेश में आंशिक बादल छाए रहने और मौसम के शुष्क रहने का अनुमान जताया गया है।

 

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