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(बड़ी खबर) सी-17 भीमकाय विमान ने भारी गर्जना के साथ की जौलीग्रांट में सफल लैंडिंग

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सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है जौलीग्रांट एयरपोर्ट

देहरादून। भारतीय सेना के सबसे भीमकाय विमान सी-17 ग्लोबमास्टर ने शुक्रवार देर रात लगभग 10:25 पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सफल लैंडिंग की।

जिसके बाद सी-17 ग्लोबमास्टर से सेना का सामान उतारा गया। जिस वक्त देर रात सी-17 ग्लोबमास्टर ने जौलीग्रांट में लैंडिंग की। उस समय लोग अपने घरों में थे। और कुछ लोग घर की छतों पर थे। विमान की भारी गर्जना के कारण सभी आसमान में देखने लगे। जिसके कुछ ही मिनटों में सी-17 ग्लोबमास्टर भारी गर्जना के साथ एयरपोर्ट पर लैंड हुआ।

चीन के साथ उत्तराखंड की सीमा सटे होने के कारण दून एयरपोर्ट का सामरिक महत्व भी है। वर्तमान में जिस तरह भारत ने चीन को हर मोर्चे पर विफल कर दिया है। उससे चीन बौखलाया हुआ है। यही कारण है कि भारत अपनी सीमाओं पर पूरी तैयारियों में जुटी हुई है।

लेकिन ये पहली बार नहीं है जब सी-17 ग्लोबमास्टर जौलीग्रांट में लैंड हुआ है। इससे पहले करीब दो साल पहले सी-17 ग्लोबमास्टर और सुखोई एमआई 30 विमान जौलीग्रांट के एयरपोर्ट पर लैंड होकर सीमाओं पर उड़ान भर चुके हैं।

रात 11 बजे तक सी-17 ग्लोबमास्टर से सेना के सामान की लोडिंग-अनलोडिंग की रही थी। जिसके बाद ये विमान रात 11:20 पेर पर जॉलीग्रांट से भारी गर्जना के साथ वापस रवाना हुआ। संभावनाएं हैं कि बहुत जल्द भारतीय सेना के फाइटर जेट भी दून के आसमान में उड़ान भरते देखे जा सकते हैं।

ये है सी-17 ग्लोबमास्टर की विशेषताएं

देहरादून। सी-17 ग्लोबमास्टर यह विश्व के बड़े मालवाहक जहाजों में से एक है। ग्लोबमास्टर कारगिल, लद्दाख और अन्य उत्तरी और उत्तर पूर्वी सीमाओं जैसे कठिन जगहों पर पर आसानी से उतर सकता है। इसके अलावा लैंडिंग में परेशानी होने की स्थिति में इसमें रिवर्स गियर भी दिया गया है। विमान चार इंजनों से लैस है।

लंबाई – 174 फीट 

चौड़ाई- 170 फीट

ऊंचाई- 55 फीट 

3500 फीट लंबी हवाई पट्टी पर उतरने की क्षमता

1500 फीट पर आपातकाल में उतारने में सक्षम

70 टन वजन ले जाने में सक्षम

42 हजार किमी तक की उड़ान भर सकता है एक बार में

150 से अधिक जवानों को एक साथ ले जाने में सक्षम

03 हेलीकॉप्टरों या दो ट्रकों को एयरलिफ्ट करने की ताकत

 

 

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