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विमान की गर्जना सुन गाय-भैंसों ने तोड़ी थी रस्सी, 35 वर्ष पूर्व खेत-खलियान छोड़ विमान देखने एयरपोर्ट दौड़े थे लोग

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80 के दशक में बिरला के विमान को देखने भागे थे लोग

Dehradun. 1970 के लगभग देहरादून-ऋषिकेश मुख्य मार्ग के किनारे जौलीग्रांट के जंगल को काटकर प्रमुख उद्योगपति बिरला द्वारा एक छोटी की हवाई पट्टी बनाई गई थी।

और एक छोटे से कमरे वाला टर्मिनल हवाई पट्टी के पास बनाया गया था। उस समय बिरला इस छोटे से एयरपोर्ट का इस्तेमाल खुद के विमानों की आवाजही के लिए किया करते थे। उसके बाद उन्होंने इस एयरपोर्ट को सरकार को सौंप दिया। 80 के दशक में कभी-कभार भी यहां विमान आते थे। तब डेक्कन एयरलाइंस ने इस एयरपोर्ट पर अपनी फ्लाइट शुरू की थी। जो सप्ताह में कुछ दिन ही आती थी। जिसे बाद में बंद कर दिया गया था।

उसके बाद वीआईपी के लिए विमान और हेलीकॉप्टर ही कभी-कभार यहां आते थे। एटीसी टॉवर भी एक छोटी सी गाड़ी में ही संचालित किया जाता था। 90 के दशक में जौलीग्रांट की इस हवाई पट्टी पर सेना के जवान ग्लाईडर उड़ाया करते थे। जिसमें पीछे एक छोटा सा इंजन और पंखा लगा होता था।

उस समय विमान रनवे के दोनों तरफ से उड़ान भरा करते थे। हवाई पट्टी के चारों तरफ टूटी-फूटी तारबाड़ हुआ करती थी। जौलीग्रांट के लोग ऋषिकेश मार्ग पर जाने या अठुरवाला की तरफ जाने के लिए पैदल या साईकिल से हवाई पट्टी के बीच से होकर आवाजाही करते थे। हवाई पट्टी के किनारे बैठकर स्थानीय लोग गाय या भैंस चराया करते थे।

और हवाई पट्टी के किनारे बैठकर अक्सर ताश खेला करते थे। कई बार ऐसी भी स्थिति आती थी कि हवाई पट्टी पर गाय या भैंसें बैठी होती थी। और ऊपर आसमान में पायलट लैंडिंग के लिए भैंसों के उठने का इंतजार करता रहता था। फिर एक गाड़ी में बैठकर एयरपोर्टकर्मी डंडे लेकर भैंसों को भगाने जाया करते थे।

छोटी सी हवाई पट्टी पर ब्रेक लगने के बाद पड़ने वाले विमानों के पहियों के निशान आसानी से देखे जाते थे। आसपास के बच्चे हवाई पट्टी पर अपनी साईकिल दौड़ाया करते थे। आज जिस स्थान पर एयरपोर्ट का नया और पुराना टर्मिनल मौजूद हैं। राज्य गठन के पहले तक उस स्थान पर घना जंगल खड़ा था। जहां सुबह से शाम तक जौलीग्रांट के लोगों की भैंसें और गाए चरा करती थी। इस कार्य के लिए पूरे गांववालों ने एक आदमी लगा रखा था। जो हाथ में डंडा लेकर सीटी बजाते हुए पूरे गांव से गाय, भैंस, बैलों को इकट्ठा कर जंगल ले जाया करता था।

एयरपोर्ट पर शुरवात दौर में वायु दूत की फ्लाइट रोज सुबह आया करती थी। उसके बंद होने के बाद जेक्सन एयरलाइंस का हफ्ते में तीन दिन जहाज आता था। फिर एयर डेकन की फ्लाइट सुबह शाम आनी शुरू हुई ।

2007 से 2009 तक एटीसी मोबाइल टावर गाड़ी में चलती थी उससे पहले ग्राउंड पर 2 कमरे में ATC च्लती थी 1982 से सरकार ने एयरपोर्ट चलाया। उससे पूर्व में बिरला के पास था। 1982 से ही वायदूत की सेवा शुरू हुई थी। तब मेट ऑफिस तम्बू टेंट में हुआ करता था।

30 मार्च 2008 को हुई थी नियमित फ्लाइट शुरू

डोईवाला। रनवे विस्तार के बाद 30 मार्च 2008 को जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर वाणिज्यिक परिचालन शुरू हुआ। तब किंगफिशर कंपनी ने अपने दो छोटे विमानों से इस एयरपोर्ट पर अपनी फ्लाइटें शुरू की थी। तब नए बनाये गए दूसरे छोटे से टर्मिनल से कार्य किया जा रहा था। फरवरी 2009 में 43 करोड़ की लागत से तैयार एक और तीसरे नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया गया था। अब जिस टर्मिनल का लोकर्पण किया जा रहा है। वह एयरपोर्ट के इतिहास में चौथा टर्मिनल है।

नपा सभासद राजेश भट्ट ने कहा कि 1986 के लगभग जब बिरला का विमान जौलीग्रांट हवाई पट्टी पर उतरा था तो तब विमान की गर्जना सुनकर लोगों की गाय-भैंसों ने घुंटे से रस्सी तोड़ दी थी। वहीं खेत-खलियान में काम कर रहे लोग सब छोड़कर बिरला के विमान को देखने पहुंचे थे। और पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। तब लोग विमान के काफी करीब तक पहुंच गए थे।

डरावना था जंगल भूतों की कहानियों से डरते थे लोग

डोईवाला। जौलीग्रांट का एयरपोर्ट पुराने जमाने से लेकर अब तक दोनों ओर से थानों वन रेंज और बडकोट वन रेंज से घिरा हुआ है। जबकि एक तरफ इसके रानीपोखरी पुल के नीचे से जाखन नदी बहती है। सन् 2000 से पहले तक रानीपोखरी पुल से लेकर चोरपुलिया और पुल से 55 नंबर बैरियर तक सुनसान होने के कारण यह जगह बहुत डरावनी होती थी। दिन छिपने के बाद इस जगह से हर कोई आवाजाही करने से बचता था। यहां के जंगलों में कई बार लाश भी बरामद की गई थी।

जिस कारण भूतों की कहानियां लोगों को सच लगने लगनी थी। चोरपुलिया और रानीपोखरी पुल के बीच का इलाका कई हॉरर कहानियों के लिए फेमस था। जिसे शायद लोग अब समय के साथ भूल चुके हैं। और उस स्थान पर अब एयरपोर्ट, हाईवे, मार्केट और रंग-बिरंगी रौशनी लगाई जा चुकी हैं। इस स्थान की चकाचौंध देखकर अब इस स्थान पर कुछ लोग जानबूझकर रात में घूमने जाते हैं।

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