उत्तराखंडदेशदेहरादूनराजनीति

सुसवा नदी बचाने को किसान और विशेषज्ञों हुए एकजुट

Listen to this article

उद्गम स्थल से करनी होगी नदी को बचाने की शुरूवात

डोईवाला। प्रदूषित सुसवा नदी को फिर से पुर्नजीवित करने के लिए स्थानीय किसानों ने पर्यावरण के जानकारों के साथ चर्चा की।

नागल ज्वालापुर में सुसवा नदी के तट पर दृष्टिकोण समिति, क्लाइमेट चेंज और सुसवा क्षेत्र के निवासियों ने समस्या और समाधान दोनों पर अपनी रॉय रखी। दृष्टिकोण समिति के अध्यक्ष व क्षेत्रीय कास्तकार मोहित उनियाल ने कहा कि पहले जब ट्यूबवैल नहीं थे तो गांववाले सुसवा का पानी पीते थे। सिंचाई में भी इसी पानी को इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब सुसवा का पानी सिंचाई लायक भी नहीं रह गया है।

राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के जानवर भी यही प्रदूषित पानी पी रहे हैं। जैविक कृषि पर वर्षों से कार्य कर रहे किसान उमेद सिंह बोरा ने कहा कि सुसवा के साफ पानी की वजह से दूधली की बासमती पूरे देश में प्रसिद्ध थी। अब यह नदी देहरादून शहर का कचरा ढोकर लाती है। और किसानों के खेतों को पानी के रूप में जहर मिल रहा है।

पर्यावरण के पैरोकार आयुष जोशी ने कहा कि नदियों का कचरा इकट्ठा करने के साथ चैक डेम बनाकर कचरे का आगे बढ़ने से रोका जाना चाहिए। पब्लिक इंटर कालेज के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार ने कहा कि सुसवा नदी के पानी से फसलों में भी जहर पहुंच रहा है। जिससे किसानों को कई बिमारियां हो रही हैं। क्लाइमेट चेंज ग्रुप की प्रमुख सदस्य सलोनी रावत ने भी विचार रखे।

हिमगीरी जी यूनिर्वसिटी में शिक्षक रविद्र ने सुझाव दिया कि सुसवा के उद्गम तक जाकर फिर वहां से वाक करते हुए उसके जल में होते बदलाव का अध्ययन किया जाना चाहिए। इस दौरान राजेश पांडेय, आसिफ, सतनाम, आरिफ, शुभम कांबोज, सक्षम पांडेय आदि उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!