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डोईवाला के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क न होना बना पलायन का मुख्य कारण, इन गांवों में है सड़कों की बुरी स्थिति

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कहीं पगड़ंडी तो कहीं कच्ची सड़क लोगों की आस लगी टुटने

प्रदेश की सबसे विकसित कही जाने वाली डोईवाला की यह है दूसरी तश्वीर

Dehradun. राज्य की सबसे हॉट सीटों में शुमार डोईवाला विधानसभा को प्रदेश की सबसे विकसित विधान सभाओं में गिरा जाता है।

क्योंकि इस विधानसभा में जौलीग्रांट एयरपोर्ट, हिमालयन अस्पताल व मेडिकल कॉलेज, एसडीआरएफ मुख्यालय, होमगार्ड मुख्यालय, शुगर मिल, इंण्डस्ट्रियल एरिया और कई दूसरे व्यापारिक संस्थान भी हैं। लेकिन इस विधानसभा की दूसरी तश्वीर ये है कि यहां के कई पहाड़ी इलाकों में आजादी के बाद से लेकर अब कच्ची सड़क भी नहीं पहुंची है। लोग जान जोखिम में ड़ालकर आवाजाही करते हैं। न्याय पंचायत थानों और रानीपोखरी में अनेक पहाड़ी गांवों में जाकर ऐसा लगता है जैसे सुदूर पहाड़ी जिले के किसी दुर्गम क्षेत्र में पहुंच गए हों।

इन पहाड़ी गांवों तक सड़क नहीं पहुंचने के कारण लोगों ने भारी संख्या में यहां से पलायन कर दिया है। ज्यादातर बुजुर्ग और बूढे लोग ही गांवों में अब रह रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि उनके यहां सड़क पहुंचती तो पलायन रूकता और मैदानी क्षेत्रों में रह रहे उनके बच्चे लौटकर अपने गांव आते। लेकिन आश्वासन, घोषणाओं और फाइलों में डोईवाला के पहाड़ों की सड़कें उलझकर रह गई हैं।

लोग यदि अपने गांवों में सब्जियां उगाएं या दूसरे रोजगार के साधन अपनाएं तो सड़कें न होने से उन्हे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। थानों और रानीपोखरी के पहाड़ी इलाकों में एक नहीं दर्जन भर गांव ऐसें हैं। जहां सड़क नहीं पहुंच पाई है। ये सबसे विकसित विधानसभा कही जाने वाली डोईवाला की दूसरी तश्वीर है। जिसका जिक्र कोई बड़ा जनप्रतिनिधि नहीं करना चाहता है। पलायन के कारण यहां वोटरों की संख्या भी घटी है। जिस कारण कम वोटरों की समस्याओं को कोई भी सुलझाना नहीं चाहता है।

लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उनके गांव में सड़कें बनेंगी तो लोग वापस आकर अपने गांव में रहने लगेंगे। इससे मैदानी इलाकों में आबादी का दबाव घटेगा। और पहाड़ी इलाके आबाद होंगे। डोईवाला के पहाड़ी इलाकों से पलायन के कारण दूसरे राज्यों से लोगों ने भारी मात्रा में डोईवाला के पहाड़ी इलाकों में औने-पौने दामों पर जमीनें खरीद ली हैं। स्थानीय निवासी भूषण तिवाड़ी ने कहा कि थानों और रानीपोखरी के पहाड़ों से कई लोग देहरादून के मैदानी इलाकों में नौकरी या दूसरे रोजगार करते हैं।

लेकिन सड़कें न होने से वो प्रतिदिन अपने घर से आवाजाही नहीं कर पाते हैं। जिस कारण उन्हे मैदानी इलाकों में कमरा किराए पर लेकर रहना पड़ता है। वहीं सिंधवाल गांव के प्रधान प्रदीप सिंधवाल ने कहा कि आजादी के बाद अब जाकर सनगांव से लेकर नाही गांव तक 11 किलोमीटर सड़क की घोषणा और पर्यावरणीय स्वीकृति हुई है। लेकिन इसके बावजूद मार्ग नहीं बन सका। यह मार्ग के बनने से सनगांव, सिंधवाल गांव और नाही के लोगों को लाभ मिलता।

सड़क के इंतजार में डोईवाला का सिंधवाल गांव

डोईवाला के पहाड़ी इलाकों में इन सड़कों की है दुर्दशा

  1. वर्ष 2003-4 से लेकर अभी तक भोगपुर थानों के मध्य जाखन नदी से सनगांव नाहीं मोटर मार्ग 5 किमी पक्का मार्ग बना है। लेकिन यह मार्ग सनगांव से अभी भी लगभग डेढ़ किमी दूर है। गांव तक पहुंचने के लिए ग्रामीण प्रतिनिधियों के द्वारा कच्चा मार्ग बनाया हुआ है।

  2. सिंधवालगांव में थानों से सिंधवालगांव पुल से थोड़ा आगे तक लगभग डेढ़ किमी मार्ग और पुल निर्माण हुआ है। लेकिन गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। गांव तक पहुंचने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा कच्चा मार्ग बनाया गया है।

  3. नाहीं कला के लिए सनगांव 5 किमी के आगे से नाहीं कला तक 11 किमी मार्ग स्वीकृत है लेकिन चार वर्षों से कार्य आरंभ नहीं हुआ है। नाहीं कला तक दोपहिया वाहन से पहुंचने के लिए एक मार्ग सनगांव से तो दूसरा मार्ग सिंधवालगांव पुल से कच्चा मार्ग स्थानीय लोगों द्वारा बनाया गया है।

  4. फर्ती, जाकर, कैरवान गांव के लिए सात किमी मोटर मार्ग की घोषणा हुई थी। लेकिन अभी तक सर्वे भी नहीं हुआ है। सनगांव से यहां तक पहुंचने के लिए ग्राम प्रतिनिधियों के द्वारा कच्चा मार्ग बनाया गया है ।

  5. चित्तोर, लडवाकोट, हल्द्वाडी क्षेत्र में थानों से धारकोट तक पक्की सड़क है। लेकिन उसके बाद क्षेत्र में पहुंचने के लिए ग्रामीण प्रतिनिधियों के द्वारा कच्चा मार्ग बनाया गया है ।

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