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भानियावाला की तरफ Jolly Grant Airport बढने से बदल जाएगा ऋषिकेश मार्ग का समरेखण

अंतरर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट और एलिवेटेड मार्ग दोनो पर बराबर संयश बरकरार

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Dehradun. जौलीग्रांट एयरपोर्ट के भानियावाला की तरफ बढने के बाद देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग का तीन किलोमीटर तक समरेखण बदल जाएगा।

जिस कारण तीन किलोमीटर लंबे मार्ग को किसी दूसरे स्थान से निकालकर रानीपोखरी

पुल पर मिलाया जाएगा। जौलीग्रांट एयरपोर्ट का धार्मिक, पर्यटन और सामरिक तीनों रूपों में

काफी महत्व है। इस एयरपोर्ट पर हर साल हवाई यात्रियों की संख्या में हजारों के हिसाब से

इजाफा हो रहा है। वहीं सामरिक दृष्टि से भी जौलीग्रांट एयरपोर्ट काफी महत्वपूर्ण है।

यही कारण है कि राज्य सरकार जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने के

लिए जमीन तलाश रही है। इसके लिए रानीपोखरी की तरफ जाखन नदी तक 243

एकड वन भूमि का चार साल पहले सर्वे किया जा चुका है। जिसमें पेड़ों की गणना से लेकर

जमीन की नपाई आदि भी हो चुकी है। वहीं हाल ही में जौलीग्रांट एयरपोर्ट के दो सर्वे किए

जा चुके हैं। पहल सर्वे रनवे विस्तार का है। जिसमें एयरपोर्ट बाउंड्री से 175 मीटर लंबाई

और बाउंड्री से 75-75 मीटर चौड़ाई में कुल साढे छह हेक्टयर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर ली गई है।

वहीं एयरपोर्ट बाउंड्री से अस्सी मीटर जोगियाणा अठुरवाला की तरफ भी सर्वे किया

जा रहा है। यह पूरा एरिया पुरानी चोरपुलिया की तरफ है। जिसमें जमीनें अधिग्रहण के बाद

एयरपोर्ट की लाइटें व नाइट लैंडिंग लगाई जाएगी। दूसरा सर्वे एयरपोर्ट को इंटरनेशनल

बनाने को लेकर किया गया है। जिसमें रनवे की लंबाई 2700 मीटर से बढाकर 3650 मीटर की

जाएगी। जिसमें दुर्गा चौक भानियावाला के पास तक एयरपोर्ट बाउंड्री से 950 मीटर लंबाई

तक जमीनों, मकानों, दुकानों, होटलों आदि का सर्वे किया जा चुका है। इसी भूमि पर इंटरनेशल

एयरपोर्ट को बनाया जाना प्रस्तावित है। यदि दुर्गा चौक की तरफ बढता है तो फिर देहरादून-

ऋषिकेश मार्ग का भानियावाला से लेकर रानीपोखरी जाखन पुल तक का समरेखण

बदल जाएगा। यानि इस तीन किलोमीटर मार्ग को कहीं और से निकाला जाएगा।

 

पुरानी चोरपुलिया बाजार

 

ऋषिकेश फोन लेकन का 950 करोड़ का है प्रोजेक्ट

डोईवाला। भानियावाला से लेकर ऋषिकेश तक फोर लेन बनाने को 950 करोड़ का

प्रोजेक्ट रखा गया है। जिसमें 2.2 किलोमीटर भानियावाला से लेकर

जौलीग्रांट तक एलिवेटेड मार्ग बनाया जाना प्रस्तावित है। जिसकी पूरी प्रक्रिया संबधित

विभाग ने संपन्न कर ली है। लेकिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट की स्थिति पूरी तरह

साफ नहीं होने से एलिवेटेड मार्ग की टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।

और अंतिम चरण तक पहुंचकर यह कार्य कछुवा गति से चल रहा है। ऋषिकेश हाईवे

के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पंकज मोर्य ने कहा कि भानियावाला-ऋषिकेश एलिवेटेड मार्ग

की टेंडरिंग प्रक्रिया गतिमान है। लेकिन एयरपोर्ट के भानियावाला की तरफ बढने

से संबधित कोई आदेश उनके पास नहीं आया है।

 

एयरपोर्ट बाउंड्री के पास वाला क्षेत्र।

एलिवेटेड बने या इंटरनेशल एयरपोर्ट दोनों स्थिति में प्रभावित होंगे लोग

डोईवाला। भानियावाला से जौलीग्रांट तक एलिवेटेड मार्ग बने या फिर जौलीग्रांट से

भानियावाला की तरफ अंतरर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाया जाए। इन दोनों स्थितियों

में सैकड़ों परिवारों, दुकानदारों व व्यवसायियों का प्रभावित होना तय है।

बल्कि जिस अंतरर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का लोग विरोध कर रहे हैं। उससे कम नुकसान और

एलिवेटेड मार्ग से अधिक नुकसान होगा। क्योंकि एयरपोर्ट के लिए जमीनें अधिग्रहण

करने पर लोगों को सरकार द्वारा तय मुआवजा दिया जाएगा।

लेकिन यदि लोगों की जमीनों, घरों, दुकानों, होटलों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों

के ऊपर से फ्लाई ओवर जाएगा तो लोगों के जमीनों, घरों, दुकानों, होटलों और

व्यापारिक प्रतिष्ठान बुरी तरह प्रभावित होंगे। जमीनों की कीमत कौड़ियों के भाव

हो जाएगी। और व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित होगा। उधर एयरपोर्ट निदेशक

प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि एयरपोर्ट के थानों के जंगल की तरफ बढने का प्रस्ताव

उनके संज्ञान में है। लेकिन भानियावाला की तरफ एयरपोर्ट विस्तारीकरण की कोई

आधिकारिक जानकारी उनके पास नहीं है।

20 अगस्त को एयरपोर्ट में आया था जल सैलाब

डोईवाला। पिछले वर्ष बीस अगस्त को जौलीग्रांट एयरपोर्ट के टर्मिनल में जाखन

नदी में आई बाढ का पानी घुस गया था। एयरपोर्ट जाने वाला मार्ग नदी में तब्दील हो

गया था। और जाखन नदी ने एयरपोर्ट टर्मिनल का रूख कर लिया था।

इसलिए इस तरफ एयरपोर्ट को बढाने में काफी खतरा भी है। दूसरा जाखन नदी

ऊपर और एयरपोर्ट रनवे काफी गहरा है। जिस आगे बढाने को काफी मिट्टी का

भरान करना होगा। तीसरा जाखन नदी किनारे घना जंगल खड़ा है।

जिसे काटकर ही एयरपोर्ट बनाया जा सकता है। जिसमें पर्यावरण प्रेमियों व

संगठनों के आंदोलन का भी अंदेशा है। वहीं जाखन नदी पार सामने भोगपुर की

पहाड़ियां हैं। जिससे विमानों को भविष्य में खतरा भी हो सकता है।

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